यदि आप और मुंबई के डार्क इतिहास में रुचि रखते हैं, तो यह एक शानदार डॉक्यूमेंट्री है। यह आपको सोचने पर मजबूर कर देती है कि न्याय और अपराध के बीच की रेखा कितनी धुंधली हो सकती है।
फिल्म केवल दाऊद इब्राहिम या छोटा राजन के बारे में नहीं है; यह उस के बारे में है जिसने उन्हें खत्म करने के लिए 'एनकाउंटर' को एक हथियार बनाया। कहानी को पुलिस अधिकारियों (जैसे प्रदीप शर्मा और रवींद्र आंग्रे) और उस दौर को कवर करने वाले पत्रकारों के नजरिए से सुनाया गया है। 2. मुख्य आकर्षण (Key Highlights)
यह डॉक्यूमेंट्री 1990 के दशक के मुंबई की असल कहानी दिखाती है, जब शहर "डी-कंपनी" और दाऊद इब्राहिम के खौफ में था। यह फिल्म मुख्य रूप से पुलिस अधिकारियों के उदय और उनके द्वारा माफिया राज को खत्म करने के विवादास्पद तरीकों पर आधारित है। गहरा विश्लेषण (Deep Review) 1. विषय और कहानी (Theme & Narrative)
आपके पास जो फाइल है ( 1080p NF WEB-DL DUAL ), उसकी गुणवत्ता उच्च (High Definition) होगी।
अगर आपने पहले 'ब्लैक फ्राइडे' या 'शूटआउट एट लोखंडवाला' जैसी फिल्में देखी हैं, तो इसमें दी गई जानकारी आपके लिए बहुत नई नहीं होगी। निष्कर्ष
फिल्म में 90 के दशक के असली समाचार फुटेज और क्राइम सीन की तस्वीरों का बेहतरीन इस्तेमाल किया गया है, जो इसे बहुत प्रामाणिक (authentic) बनाता है।
यदि आप और मुंबई के डार्क इतिहास में रुचि रखते हैं, तो यह एक शानदार डॉक्यूमेंट्री है। यह आपको सोचने पर मजबूर कर देती है कि न्याय और अपराध के बीच की रेखा कितनी धुंधली हो सकती है।
फिल्म केवल दाऊद इब्राहिम या छोटा राजन के बारे में नहीं है; यह उस के बारे में है जिसने उन्हें खत्म करने के लिए 'एनकाउंटर' को एक हथियार बनाया। कहानी को पुलिस अधिकारियों (जैसे प्रदीप शर्मा और रवींद्र आंग्रे) और उस दौर को कवर करने वाले पत्रकारों के नजरिए से सुनाया गया है। 2. मुख्य आकर्षण (Key Highlights)
यह डॉक्यूमेंट्री 1990 के दशक के मुंबई की असल कहानी दिखाती है, जब शहर "डी-कंपनी" और दाऊद इब्राहिम के खौफ में था। यह फिल्म मुख्य रूप से पुलिस अधिकारियों के उदय और उनके द्वारा माफिया राज को खत्म करने के विवादास्पद तरीकों पर आधारित है। गहरा विश्लेषण (Deep Review) 1. विषय और कहानी (Theme & Narrative)
आपके पास जो फाइल है ( 1080p NF WEB-DL DUAL ), उसकी गुणवत्ता उच्च (High Definition) होगी।
अगर आपने पहले 'ब्लैक फ्राइडे' या 'शूटआउट एट लोखंडवाला' जैसी फिल्में देखी हैं, तो इसमें दी गई जानकारी आपके लिए बहुत नई नहीं होगी। निष्कर्ष
फिल्म में 90 के दशक के असली समाचार फुटेज और क्राइम सीन की तस्वीरों का बेहतरीन इस्तेमाल किया गया है, जो इसे बहुत प्रामाणिक (authentic) बनाता है।